
उत्तराखंड में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूली की व्यवस्था तकनीकी दिक्कतों से जूझ रही है। प्रदेश की सीमाओं पर लगाए गए 37 कैमरों की नजर से कई वाहन छूट जा रहे हैं, जबकि सर्वर में पर्याप्त स्टोरेज न होने से नंबर प्लेट की तस्वीरों को समय पर प्रोसेस करने में परेशानी आ रही है।
परिवहन विभाग ने फरवरी 2026 में ग्रीन सेस वसूली की व्यवस्था शुरू की थी। इसके तहत राज्य में प्रवेश करने वाले बाहरी वाहनों की नंबर प्लेट की तस्वीर कैमरों से ली जाती है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित वाहन के फास्टैग या बैंक खाते से निर्धारित राशि काटी जाती है।
विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या डेटा स्टोरेज की है। सर्वर में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण फिलहाल केवल दो दिन तक का फोटो डेटा सुरक्षित रखा जा रहा है। इसके अलावा कुछ स्थानों पर कैमरों का कवरेज सीमित होने और बिजली आपूर्ति बाधित होने से भी वसूली प्रभावित हो रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी से सितंबर तक करीब 20 करोड़ रुपये ही ग्रीन सेस के रूप में जमा हो सके हैं। परिवहन विभाग अब सिस्टम को मजबूत करने और बिजली जाने की स्थिति में कैमरों को चालू रखने की व्यवस्था करने की तैयारी कर रहा है।



