लिपुलेख दर्रे से व्यापार शुरू होने की तैयारी, भारत-चीन संबंधों को मिलेगी नई ऊंचाई

पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र में स्थित लिपुलेख दर्रा से भारत-चीन के बीच व्यापार शुरू होने की तैयारी को दोनों देशों के संबंधों के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
करीब छह साल बाद इस पारंपरिक व्यापार मार्ग के दोबारा खुलने से न सिर्फ सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारत और चीन के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्तों को भी नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है।
प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं और जून से सितंबर तक व्यापार सत्र चलाने की योजना है। इसके लिए व्यापारियों को इनर लाइन परमिट और आगे तकलाकोट मंडी तक जाने के लिए ट्रेड पास जारी किए जाएंगे।
यह व्यापार मार्ग कोरोना महामारी और सीमा तनाव के बाद बंद हो गया था, जिससे स्थानीय व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ था। अब इसके पुनः शुरू होने से पुराने व्यापारिक संबंध बहाल होंगे और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत से मसाले, दालें, कपड़े और अन्य रोजमर्रा की वस्तुएं निर्यात की जाती हैं, जबकि तिब्बत (चीन) से ऊन, पश्मीना, रेशम और अन्य उत्पाद आयात किए जाते हैं।



