सदियों पुरानी परंपरा बहाल, छह साल बाद बिस्सू जातर लेकर हनोल जाएंगे खत पशगांव के लोग

देहरादून: जौनसार-बावर क्षेत्र की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा एक बार फिर जीवंत होने जा रही है। खत पशगांव के लोग करीब छह साल बाद बिस्सू जातर लेकर हनोल मंदिर जाएंगे। यह ऐतिहासिक जातर 14 मई को निकाली जाएगी, जिसकी तैयारियां गांवों में जोर-शोर से चल रही हैं।
जानकारी के अनुसार, खत पशगांव के लोग परंपरा के तहत हर तीन साल में बिस्सू जातर लेकर हनोल स्थित महासू देवता मंदिर जाते हैं। लेकिन पिछले छह वर्षों से यह परंपरा बाधित थी, क्योंकि छत्रधारी चालदा महासू देवता खत दसऊ पशगांव में विराजमान थे। अब देवता के हिमाचल प्रदेश के पश्मी क्षेत्र में चले जाने के बाद फिर से जातर आयोजित की जा रही है।
खत वासी 14 मई की सुबह हनोल मंदिर के लिए रवाना होंगे और 15 मई की शाम तक वापस लौटेंगे। मान्यता है कि इन दो दिनों के दौरान मंदिर में चढ़ने वाली भेंट का आधा हिस्सा खत पशगांव का होता है और इस अवधि में राजशाही अधिकार भी खत के पास रहते हैं।
स्थानीय खत स्याणों के अनुसार, यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसका क्षेत्र की संस्कृति व आस्था से गहरा जुड़ाव है। जातर में दसऊ, हाजा, डाडुवा, कितरोली, गबेला, दौधा, सुनोडा, मठियाना, भूपोऊ, गंभरी, कोठा क्वानु, मझगांव, मैलोथ, दुनुवा और मलेथा समेत कई गांवों के लोग शामिल होंगे।



