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उत्तराखंड में बिजली मांग का AI से होगा सटीक आकलन, नियामक आयोग ने जारी किया 10 साल का ड्राफ्ट प्लान

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उत्तराखंड में भविष्य की बिजली जरूरतों को लेकर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग की मदद ली जाएगी। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने राज्य की अगले 10 वर्षों की बिजली मांग और आपूर्ति का सटीक आकलन करने के लिए “रिसोर्स एडिक्वेसी फ्रेमवर्क” नियमावली 2026 का मसौदा जारी किया है।

आयोग के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत बिजली वितरण कंपनियों को पारंपरिक अनुमान प्रणाली के बजाय आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा। AI और मशीन लर्निंग की सहायता से मौसम, जनसंख्या वृद्धि, आर्थिक गतिविधियों और बिजली खपत के पैटर्न का विश्लेषण कर भविष्य की बिजली जरूरतों का अनुमान लगाया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2035-36 तक उत्तराखंड की पीक बिजली मांग 4100 मेगावाट से अधिक पहुंच सकती है। वहीं राज्य की वार्षिक ऊर्जा आवश्यकता भी 1,755 करोड़ यूनिट से बढ़कर करीब 2,635 करोड़ यूनिट होने का अनुमान है। इसे देखते हुए आयोग ने दीर्घकालिक बिजली प्रबंधन योजना पर काम शुरू कर दिया है।

नई नियमावली में “प्लानिंग रिजर्व मार्जिन” (PRM) का भी प्रावधान किया गया है, ताकि गर्मियों, त्योहारों या आपात स्थिति में अचानक बढ़ने वाली बिजली मांग से निपटा जा सके। इसके तहत यूपीसीएल को अनुमानित अधिकतम मांग से अतिरिक्त बिजली का प्रबंध पहले से रखना होगा।

आयोग ने मसौदे पर सभी हितधारकों से 12 जून तक सुझाव मांगे हैं। साथ ही बिजली खरीद के लिए नए मानक तय करते हुए वितरण कंपनियों को अपनी कुल जरूरत का 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा दीर्घकालिक अनुबंधों से सुनिश्चित करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर उपभोक्ताओं पर कम पड़े।

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