मुंबई कोर्ट का बड़ा फैसला: किरायेदार की मौत के बाद देखभाल करने वाले को फ्लैट खाली करना होगा, उत्तराधिकारी नहीं तो नहीं मिलेगा अधिकार

मुंबई: मुंबई की एक अदालत ने किरायेदारी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी व्यक्ति का फ्लैट में रहना केवल देखभाल या सेवा संबंध (caretaker/service relationship) के आधार पर था और वह मृत किरायेदार का कानूनी उत्तराधिकारी नहीं है, तो उसे उस संपत्ति पर किरायेदारी का अधिकार नहीं मिलेगा। अदालत ने ऐसे व्यक्ति को फ्लैट तत्काल खाली करने का निर्देश दिया।
मामला दादर स्थित एक फ्लैट से जुड़ा था, जहां मूल किरायेदार की मृत्यु के बाद उसकी देखभाल करने वाला व्यक्ति फ्लैट में रह रहा था। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल लंबे समय तक रहने या देखभाल करने से कोई व्यक्ति स्वतः किरायेदार या उत्तराधिकारी नहीं बन जाता। यदि वह वैध कानूनी उत्तराधिकारी नहीं है, तो उसे संपत्ति पर कब्जा बनाए रखने का अधिकार नहीं है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सेवा या देखभाल के संबंध में दी गई रहने की अनुमति को किरायेदारी नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में संपत्ति पर अधिकार केवल कानून के तहत पात्र उत्तराधिकारियों को ही मिल सकता है। इसलिए संबंधित व्यक्ति को “अनधिकृत कब्जाधारी” मानते हुए फ्लैट खाली करने का आदेश दिया गया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला किरायेदारी और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है। इससे स्पष्ट संदेश गया है कि संपत्ति पर अधिकार केवल वैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही तय होंगे, न कि केवल लंबे समय तक वहां रहने या देखभाल करने के आधार पर।



