आदिबदरी मंदिर पर बढ़ा खतरा: प्राचीन मंदिर की दीवारों में चौड़ी हुईं दरारें, धंस रहे पत्थर से सुरक्षा पर चिंता

चमोली/कर्णप्रयाग: उत्तराखंड के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले आदिबदरी मंदिर की संरचनात्मक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। मंदिर की दीवारों में पहले से मौजूद दरारें अब और चौड़ी होती जा रही हैं, जबकि कई स्थानों पर पत्थरों के धंसने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इससे मंदिर की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बारिश, नमी और समय के साथ मंदिर की संरचना कमजोर होती जा रही है। मंदिर परिसर में कई पत्थर अपनी मूल स्थिति से खिसक गए हैं और कुछ स्थानों पर जमीन धंसने के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यदि समय रहते संरक्षण कार्य नहीं किया गया तो प्राचीन धरोहर को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
मंदिर से जुड़े लोगों ने संबंधित विभागों से तत्काल तकनीकी सर्वे कराने और विशेषज्ञों की निगरानी में संरक्षण कार्य शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि आदिबदरी मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मंदिर की वर्तमान स्थिति का विस्तृत संरचनात्मक आकलन कर आवश्यक मरम्मत और संरक्षण कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। इससे भविष्य में किसी बड़े नुकसान को रोका जा सकेगा और इस प्राचीन धरोहर को सुरक्षित रखा जा सकेगा।



