उत्तराखंड में 18 साल में 178 से बढ़कर 560 हुई बाघों की संख्या, फिर भी एसटीपीएफ में 81 पद अब तक खाली

देहरादून: उत्तराखंड में पिछले 18 वर्षों के दौरान बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2006 में जहां राज्य में 178 बाघ थे, वहीं वर्ष 2022 की गणना के अनुसार यह संख्या बढ़कर 560 हो गई है। हालांकि, बाघों की बढ़ती संख्या के बावजूद उनकी सुरक्षा के लिए गठित स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (STPF) में 81 पद अब भी रिक्त हैं, जिससे वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता जताई जा रही है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बेहतर संरक्षण, प्राकृतिक आवास के विकास, शिकार पर नियंत्रण और प्रभावी निगरानी के कारण राज्य में बाघों की आबादी लगातार बढ़ी है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, राजाजी टाइगर रिजर्व और अन्य वन क्षेत्रों में संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है।
इसके बावजूद एसटीपीएफ में 81 पद खाली होने से गश्त, निगरानी और वन्यजीव अपराधों पर नियंत्रण जैसी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की बढ़ती संख्या के साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करना आवश्यक है, ताकि शिकार, अवैध तस्करी और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड देश के प्रमुख टाइगर लैंडस्केप में शामिल है। ऐसे में रिक्त पदों पर जल्द भर्ती कर एसटीपीएफ को सशक्त बनाना जरूरी है। इससे बाघों के संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्रों की सुरक्षा और जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी।



