चंपावत में मिला दुर्लभ पांच सींग वाला ‘गैंडा कीट’, यूपाटोरस हार्डविकेई प्रजाति की मौजूदगी से वैज्ञानिक उत्साहित

चंपावत: उत्तराखंड के चंपावत जिले में पहली बार दुर्लभ पांच सींग वाले भृंग यूपाटोरस हार्डविकेई (Eupatorus hardwickei) की मौजूदगी दर्ज की गई है। गैंडा कीट (Rhinoceros Beetle) के नाम से पहचाने जाने वाले इस दुर्लभ कीट की खोज ने क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को एक बार फिर उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रजाति की मौजूदगी चंपावत के प्राकृतिक वातावरण के दुर्लभ जीवों के लिए अनुकूल होने का संकेत है।
जानकारी के अनुसार, यह दुर्लभ भृंग 18 जुलाई को चंपावत स्थित बालेश्वर महादेव मंदिर परिसर में स्थानीय निवासी नरेंद्र को दिखाई दिया था। इसके बाद विशेषज्ञों और वन विभाग ने इसकी पहचान की पुष्टि की, जिसके बाद इसे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण जैविक खोज माना गया।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस प्रजाति के मिलने से चंपावत के जंगलों में अन्य दुर्लभ जीव-जंतुओं की मौजूदगी की संभावना भी बढ़ गई है। इससे जैव विविधता, पारिस्थितिकी और संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययनों को नई दिशा मिल सकती है। विशेषज्ञों ने ऐसे संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्रों के संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन पर विशेष जोर दिया है।
यूपाटोरस हार्डविकेई अपने चमकदार कवच और शरीर पर मौजूद पांच सींगों के कारण बेहद आकर्षक दिखाई देता है। यह प्रजाति अत्यधिक नमी वाले ठंडे और घने सदाबहार वनों में रहना पसंद करती है। इसके दुर्लभ स्वरूप के कारण दुनियाभर के कीट वैज्ञानिकों के बीच इसकी विशेष पहचान है।
इतिहास और संस्कृति में भी भृंग का विशेष महत्व रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्राचीन काल में इसके चमकदार पंखों का उपयोग सजावटी वस्तुओं और मुगलकालीन शाही वस्त्रों की जरी कढ़ाई में किया जाता था। वहीं भारतीय पौराणिक परंपराओं में भृंग शब्द का संबंध भृंगी ऋषि से भी जोड़ा जाता है, जिनका उल्लेख शिव पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।



