उत्तराखंड में मानसून कमजोर: कई जिलों में सामान्य से कम बारिश, खेती और जल स्रोतों पर बढ़ी चिंता

देहरादून: उत्तराखंड में इस बार मानसून अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। प्रदेश के कई जिलों में अब तक सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे खेती, पेयजल स्रोतों और जलाशयों को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में बारिश का बड़ा घाटा दर्ज किया गया है, जबकि कुछ जिलों में ही सामान्य या उससे अधिक वर्षा हुई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान बारिश का असमान वितरण देखने को मिल रहा है। कहीं भारी वर्षा से भूस्खलन और सड़कें बाधित हो रही हैं, तो कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश के कारण कृषि गतिविधियां प्रभावित होने लगी हैं। धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो इसका असर जल स्रोतों, सिंचाई व्यवस्था और पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक जलधाराओं का जलस्तर भी वर्षा पर निर्भर करता है, ऐसे में लंबे समय तक बारिश की कमी चुनौती बन सकती है।
हालांकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है, लेकिन पूरे राज्य में समान रूप से अच्छी वर्षा होने की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है। प्रशासन और कृषि विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसानों को मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्य करने की सलाह दी जा रही है।



