रुड़की: रवासन नदी पर झूला पुल होता तो बच सकती थी छात्र की जान, वर्षों से अधूरी है ग्रामीणों की मांग

रुड़की: रवासन नदी पर सुरक्षित आवाजाही के लिए झूला पुल की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। शुक्रवार को स्कूल से लापता 14 वर्षीय छात्र आर्यन का शव नदी किनारे मिलने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश और चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी पर झूला पुल होता तो बरसात के दिनों में लोगों को उफनती नदी पार करने का जोखिम नहीं उठाना पड़ता।
बरसात में उफनती है रवासन नदी
रसूलपुर, रसूलपुर गोट और आर्यनगर गांव के लोगों के लिए रवासन नदी बरसात के मौसम में बड़ी चुनौती बन जाती है। सामान्य दिनों में नदी में पानी कम रहने के कारण लोग आसानी से आवागमन कर लेते हैं, लेकिन बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ने पर नदी पार करना जानलेवा साबित हो सकता है। शुक्रवार को छात्र की मौत के बाद ग्रामीणों ने झूला पुल की मांग को फिर प्रमुखता से उठाया है।
सात हजार की आबादी को करना पड़ता है अतिरिक्त सफर
ग्रामीणों के अनुसार, रसूलपुर, रसूलपुर गोट और आर्यनगर की करीब सात हजार की आबादी का लालढांग से सीधा संपर्क है। इन गांवों से लालढांग की दूरी महज एक से चार किलोमीटर है, लेकिन रवासन नदी के बीच में होने के कारण बरसात में लोगों को करीब सात से दस किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ता है। ग्रामीणों को बाजार, अस्पताल, बैंक और अन्य जरूरी कार्यों के लिए लालढांग आना-जाना पड़ता है।
नदी में बहने की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं
रवासन नदी में लोगों के बहने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 19 अगस्त को रसूलपुर निवासी 30 वर्षीय प्रदीप पुत्र शेखर भी घर से जाने के बाद वापस नहीं लौटा था। परिजनों ने उसके नदी में बहने की आशंका जताई थी। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में नदी का बढ़ता जलस्तर हर साल खतरा पैदा करता है।
वर्षों से पुल बनाने की मांग
रसूलपुर मीठीबेरी ग्राम पंचायत के ग्रामीण लंबे समय से रवासन नदी पर झूला पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से न केवल बरसात में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित होगी, बल्कि आसपास के गांवों के लोगों को लंबा रास्ता तय करने से भी राहत मिलेगी। छात्र की मौत के बाद अब ग्रामीणों ने प्रशासन से पुल निर्माण की मांग जल्द पूरी करने की अपील की है।



