महाराष्ट्र में डॉक्टरों से मारपीट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- ऐसे लोगों को हिरासत में होना चाहिए

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में अस्पताल के भीतर डॉक्टरों से मारपीट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। शिवसेना के पार्षद रमेश सुख्र्या म्हात्रे से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि अस्पताल में चिकित्सा कर्मियों पर हमला बेहद गंभीर मामला है और ऐसे लोगों को जमानत का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि अस्पताल में ही डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों को धमकाया या पीटा जाएगा, तो आम लोगों की मदद के लिए कौन आगे आएगा। अदालत ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
मामला ठाणे जिले के कल्याण स्थित शास्त्रीनगर अस्पताल का है, जहां 6 जुलाई को डॉक्टरों के साथ कथित मारपीट हुई थी। आरोप है कि एक गर्भवती महिला के परिजनों द्वारा इलाज में देरी का आरोप लगाए जाने के बाद विवाद हुआ और इसके बाद अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई। घटना का वीडियो भी सामने आया था।
इस मामले में मजिस्ट्रेट अदालत ने म्हात्रे को जमानत दे दी थी। इसके बाद डॉक्टरों के विरोध के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जमानत पर रोक लगा दी थी। बाद में हाईकोर्ट ने कड़ी शर्तों के साथ उन्हें जमानत दी, जिसमें महाराष्ट्र से बाहर रहने और नियमित रूप से पुलिस थाने में रिपोर्ट करने जैसी शर्तें शामिल थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह हाईकोर्ट के शुरुआती आदेश को बरकरार रखने के पक्ष में है। राज्य सरकार ने भी म्हात्रे को दी गई जमानत को चुनौती देने की बात कही है। भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) ने भी सुनवाई के दौरान जमानत का विरोध किया। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित की गई है।



