छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सिर्फ रिश्वत के रुपये बरामद होना काफी नहीं, मांग साबित करना जरूरी

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रिश्वतखोरी के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केवल रिश्वत की रकम बरामद होना दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष को आरोपी द्वारा रिश्वत की मांग और उसके स्वीकार किए जाने को भी ठोस साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होगा।
यह मामला सूरजपुर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में पदस्थ एक लेखापाल से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार, एक स्कूल की मान्यता के संबंध में लेखापाल ने पहले 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी, जिसे बाद में 8 हजार रुपये तय किया गया। एंटी करप्शन ब्यूरो ने 30 जून 2014 को कार्रवाई करते हुए आरोपी को कथित तौर पर रिश्वत की रकम के साथ पकड़ा था।
मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने ही कहा कि लेखापाल ने उससे रिश्वत की मांग नहीं की थी। एक अन्य गवाह ने भी बताया कि शिकायतकर्ता ने पैसे आरोपी की जेब में डाल दिए थे। हाईकोर्ट ने पाया कि किसी गवाह ने रिश्वत मांगने के आरोप की पुष्टि नहीं की।
अदालत ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में भी खामियां पाईं। ऑडियो रिकॉर्डिंग के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र नहीं लिया गया था, आरोपी की आवाज का नमूना भी नहीं लिया गया और रिकॉर्डिंग की फोरेंसिक जांच नहीं कराई गई थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के मार्च 2017 के फैसले को रद्द कर दिया और आरोपी लेखापाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया।



