
प्रयागराज: केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की इलाहाबाद पीठ ने कहा है कि केवल एफआईआर दर्ज होने, आपराधिक मामला लंबित होने या चार्जशीट दाखिल होने के आधार पर किसी कर्मचारी को अयोग्य मानकर सेवा से बर्खास्त नहीं किया जा सकता। कैट ने डाक विभाग के एक ग्रामीण डाक सेवक की सेवा समाप्ति का आदेश रद्द करते हुए उसे तत्काल सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया।
मामला बुलंदशहर निवासी अर्पित बरगोती से जुड़ा है। उन्हें 23 दिसंबर 2024 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा मंडल स्थित डांगोली डाकघर में ग्रामीण डाक सेवक के पद पर अस्थायी नियुक्ति मिली थी। 24 दिसंबर को उन्होंने कार्यभार संभाला था।
मई 2025 में मिली पुलिस सत्यापन रिपोर्ट में उनके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत तीन आपराधिक मामले दर्ज होने और उनमें अदालत में चार्जशीट दाखिल होने की जानकारी दी गई। इसके बाद डाक विभाग ने 9 अक्तूबर 2025 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं।
अर्पित ने सेवा समाप्ति के आदेश को कैट में चुनौती दी। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि उन्होंने किसी तथ्य को छिपाया नहीं था और किसी भी मामले में उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अवतार सिंह बनाम भारत संघ (2016) और पवन कुमार बनाम भारत संघ (2020) के फैसलों का भी हवाला दिया।
कैट ने सुनवाई के बाद पाया कि कर्मचारी के खिलाफ किसी अदालत से दोषसिद्धि नहीं हुई है। पीठ ने सेवा समाप्ति का आदेश निरस्त करते हुए कर्मचारी को पद पर बहाल करने का निर्देश दिया।



