
चमोली। केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग ने हिमालयन थार के संरक्षण के लिए बुग्यालों में मानवीय हस्तक्षेप कम करने की कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत अभयारण्य क्षेत्र में स्वच्छता अभियान चलाने के साथ लोगों को वन्यजीवों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में करीब 975 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य में बड़ी संख्या में हिमालयन थार पाए जाते हैं। प्रभाग के सर्वेक्षण में सामने आया कि पर्यटक, तीर्थयात्री और स्थानीय लोग थार को खाने की चीजें दे रहे हैं। भोजन की तलाश में ये वन्यजीव अब अपने प्राकृतिक आवास से निकलकर सड़कों और आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचने लगे हैं।
अभयारण्य के निचले क्षेत्रों चोपता, सारी, कांचुलाखर्क, सौखर्क और मंडल में कूड़ा जमा होने के कारण भी थार की आवाजाही बढ़ी है। इससे उनके प्राकृतिक व्यवहार और जीवनशैली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
वन विभाग अब विभिन्न स्थानों पर साइन बोर्ड लगाकर लोगों से वन्यजीवों को भोजन न देने की अपील करेगा। साथ ही बुग्यालों में मानवीय गतिविधियों को नियंत्रित करने और वन्यजीवों व वनस्पतियों के संरक्षण के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ रजत सुमन के अनुसार, प्राकृतिक आवासों में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप के कारण वन्यजीवों के व्यवहार में बदलाव आ रहा है, इसलिए उनके आवासों को सुरक्षित रखना जरूरी है।



