
हरिद्वार: किसानों की आय बढ़ाने के लिए जिले में पारंपरिक फसलों के साथ नई फसलों को बढ़ावा देने की तैयारी है। इसी क्रम में अब हरिद्वार में मखाने की खेती का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। उद्यान विभाग ने शुरुआती चरण में 120 बीघा भूमि पर मखाने की खेती कराने का लक्ष्य तय किया है। किसानों को इसके लिए 40 प्रतिशत अनुदान भी दिया जाएगा।
जिले में अधिकांश किसान गन्ना, धान और गेहूं की खेती करते हैं। किसानों को नई और अधिक आय देने वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित करने के लिए मखाने की खेती को विकल्प के तौर पर आजमाया जा रहा है। एक हेक्टेयर में मखाने की खेती पर करीब 1.31 लाख रुपये की लागत अनुमानित है, जिसमें 40 प्रतिशत यानी 52,400 रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
एक किसान अधिकतम एक हेक्टेयर भूमि पर इस योजना का लाभ ले सकेगा। तालाबों के अलावा खेतों को तालाबनुमा बनाकर भी मखाने की खेती की जा सकेगी। किसानों को खेती की तकनीक की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण भी कराया जा चुका है। कुछ किसानों को बिहार के सहरसा स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान, अगवानपुर में तीन दिवसीय प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था।
उद्यान विभाग ने किसानों का चयन शुरू कर दिया है। नवंबर और दिसंबर में चयनित किसानों के माध्यम से मखाने की खेती शुरू कराई जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने पर जिले में इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। मखाने से नमकीन, लड्डू, खीर, पाउडर और मखाना मिश्रित आटा जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने के लिए भी किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।



