
उत्तराखंड में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, जबकि दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए गठित जिला सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकें निर्धारित संख्या से काफी कम हो रही हैं। नियमानुसार हर जिले में हर महीने बैठक होनी चाहिए, लेकिन इस वर्ष अगस्त तक प्रदेश में 156 के मुकाबले केवल 54 बैठकें ही हुईं।
आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में सड़क हादसों की संख्या 2021 में 1,405 से बढ़कर 2025 में 1,846 हो गई। वहीं, इस वर्ष अगस्त तक 1,480 हादसों में 884 लोगों की मौत हो चुकी है। देहरादून, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार समेत कई जिलों में हादसों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकें भी लगातार कम हुई हैं। वर्ष 2023 में 100, 2024 में 84 और 2025 में 84 बैठकें हुईं, जबकि हर साल 156 बैठकें होनी चाहिए थीं। इस वर्ष अगस्त तक केवल 54 बैठकें हुई हैं। परिवहन विभाग ने आरटीओ और एआरटीओ को बैठकें नियमित कराने के निर्देश दिए हैं।
परिवहन विभाग के मुताबिक शाम छह से रात नौ बजे के बीच सबसे अधिक सड़क हादसे होते हैं। इसके बाद दोपहर तीन से शाम छह बजे का समय भी दुर्घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील है। जून में सबसे ज्यादा हादसे दर्ज किए गए।



