हरिद्वार भूमि घोटाले में विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई, आरोपी IAS अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी

देहरादून: बहुचर्चित हरिद्वार भूमि घोटाला मामले में विजिलेंस विभाग ने जांच तेज करते हुए आरोपित IAS अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मामले में सबूत जुटाने और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच के लिए की गई।
सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस की टीमों ने देहरादून समेत कई स्थानों पर एक साथ दबिश दी। छापेमारी के दौरान जमीन खरीद से जुड़े दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड खंगाले गए। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा वर्ष 2024 में करीब 54 करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन से जुड़ा है। जांच में आरोप है कि कूड़ा निस्तारण स्थल के पास स्थित इस भूमि को बाजार मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर खरीदा गया, जिससे सरकारी धन को भारी नुकसान पहुंचा।
इससे पहले उत्तराखंड सरकार विजिलेंस जांच के आधार पर कई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और आपराधिक कार्रवाई को मंजूरी दे चुकी है। सरकार ने 2017 बैच के IAS अधिकारी वरुण चौधरी की सेवा समाप्त करने की सिफारिश भी की है, जबकि तत्कालीन हरिद्वार जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी से प्राप्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जाएगी। यदि जांच में और अनियमितताएं सामने आती हैं तो मामले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।



