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गया में गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल, मुस्लिम आबादी नहीं फिर भी पीढ़ियों से मुहर्रम मना रहे हिंदू परिवार

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गया (बिहार): बिहार के गया जिले के फतेहपुर प्रखंड में सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है। यहां कई ऐसे गांव हैं जहां मुस्लिम आबादी नहीं है, लेकिन इसके बावजूद हिंदू परिवार पीढ़ियों से पूरे श्रद्धा और परंपरा के साथ मुहर्रम मनाते आ रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, मुहर्रम के अवसर पर हिंदू परिवार ताजिया तैयार कराते हैं, जुलूस निकालते हैं और वर्षों पुरानी परंपराओं का पालन करते हैं। जिन गांवों में मुस्लिम समुदाय नहीं रहता, वहां भी धार्मिक रीति-रिवाजों को निभाने के लिए मौलाना को बुलाया जाता है। कई स्थानों पर ताजिया मुस्लिम कारीगरों से बनवाया जाता है, जबकि कुछ गांवों में हिंदू परिवार स्वयं ताजिया तैयार करते हैं।

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, फतेहपुर प्रखंड में इस वर्ष मुहर्रम के लिए जारी 167 लाइसेंसों में से लगभग 60 लाइसेंस हिंदू परिवारों के नाम जारी किए गए हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इलाके में आपसी भाईचारे तथा गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक मानी जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां धर्म से ऊपर उठकर एक-दूसरे के त्योहारों का सम्मान करने की परंपरा रही है। यही कारण है कि मुहर्रम के अवसर पर हिंदू परिवार बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं, जबकि अन्य धार्मिक अवसरों पर मुस्लिम समुदाय भी हिंदू पर्व-त्योहारों में शामिल होकर सामाजिक सौहार्द को मजबूत करता है।

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