उत्तराखंड में बढ़ रहा मोटापा: हर तीसरी महिला अधिक वजन या मोटापे की शिकार, NFHS-6 रिपोर्ट में खुलासा

नैनीताल। उत्तराखंड में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 34.3 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं। यानी प्रदेश में करीब हर तीसरी महिला इस समस्या से जूझ रही है। पुरुषों में अधिक वजन या मोटापे का आंकड़ा 26.5 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
रिपोर्ट में मोटापे के साथ कुपोषण की स्थिति भी सामने आई है। 15.5 प्रतिशत महिलाओं और 17.8 प्रतिशत पुरुषों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 18.5 से कम पाया गया, जो सामान्य से कम वजन और कुपोषण की ओर संकेत करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक ओर जहां राज्य में मोटापा बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कम वजन की समस्या भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
शहरों में महिलाओं में मोटापे की दर ज्यादा
NFHS-6 के आंकड़ों के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में महिलाओं में अधिक वजन या मोटापे की समस्या ग्रामीण इलाकों की तुलना में ज्यादा है। शहरों में 42.8 प्रतिशत महिलाएं और 28.7 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त पाए गए। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा महिलाओं के लिए 30.6 प्रतिशत और पुरुषों के लिए 25.3 प्रतिशत रहा।
पांच साल में महिलाओं में बढ़ा मोटापा
NFHS-5 के वर्ष 2019-21 के आंकड़ों की तुलना में महिलाओं में अधिक वजन या मोटापे की दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। उस समय 29.8 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त थीं, जो अब बढ़कर 34.3 प्रतिशत हो गई है। पुरुषों में यह आंकड़ा 27.1 प्रतिशत से थोड़ा घटकर 26.5 प्रतिशत दर्ज किया गया।
बदलती जीवनशैली और खानपान प्रमुख कारण
डाइटीशियन आशा सिंह के अनुसार बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और असंतुलित खानपान मोटापे के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। शहरी क्षेत्रों में व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों में कमी, मशीनों पर बढ़ती निर्भरता तथा फास्ट फूड के अधिक सेवन से समस्या बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा और कुपोषण का एक साथ मौजूद रहना राज्य के लिए दोहरी पोषण चुनौती है।



