NALSAR विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने BCI के आदेश किए रद्द, कहा- कानून के छात्रों के आचरण को नियंत्रित करने का अधिकार नहीं

नई दिल्ली। NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के पास कानून के छात्रों के आचरण को नियंत्रित करने या उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की वैधानिक शक्ति नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में BCI की ओर से जारी दो अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया।
तीन सदस्यीय पीठ ने सुनाया फैसला
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। पीठ ने कहा कि जब तक कानून के छात्र अधिवक्ता के रूप में नामांकित नहीं हो जाते, तब तक वे कानूनी पेशे को नियंत्रित करने वाले वैधानिक ढांचे के तहत BCI के अनुशासनात्मक नियंत्रण में नहीं आते।
अदालत ने कहा कि छात्रों के आचरण से जुड़े मामलों में कार्रवाई का अधिकार संबंधित शैक्षणिक संस्थान के पास है। विश्वविद्यालय अपने नियमों और विनियमों के अनुसार ऐसे मामलों पर निर्णय ले सकता है।
NALSAR के 2026 बैच से जुड़ा था विवाद
यह पूरा मामला हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों से जुड़ा है। विश्वविद्यालय में प्रस्तावित दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की भागीदारी को लेकर कुछ छात्रों ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद मामला विवाद में आ गया था।
14 अगस्त को BCI ने राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि NALSAR के 2026 बैच के कानून स्नातकों का अधिवक्ता के रूप में नामांकन अगले आदेश तक न किया जाए। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद BCI ने अपने दोनों आदेश कुछ ही घंटों में वापस ले लिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने BCI के हस्तक्षेप पर उठाया सवाल
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर मुख्य न्यायाधीश ने BCI के हस्तक्षेप पर कड़ी आपत्ति जताई थी। अदालत ने संकेत दिया था कि छात्रों और मुख्य न्यायाधीश के बीच संवाद के मामले में BCI का हस्तक्षेप उचित नहीं था। अब अदालत ने अपने आदेश में BCI की वैधानिक शक्तियों की सीमा स्पष्ट कर दी है।
छात्रों के अनुशासन का जिम्मा विश्वविद्यालय का
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के आचरण और अनुशासन से जुड़े मामलों में प्राथमिक अधिकार संबंधित विश्वविद्यालय या शैक्षणिक संस्थान का होगा। BCI की भूमिका मुख्य रूप से अधिवक्ताओं के पेशेवर आचरण और कानूनी पेशे से जुड़े वैधानिक मामलों तक सीमित है।



