देहरादून: पीएमकेएसवाई में कथित फर्जीवाड़े की मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश, संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी को जिम्मेदारी

देहरादून: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) की माइक्रो इरिगेशन योजना में कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोपों की अब मजिस्ट्रीयल जांच होगी। जिलाधिकारी के निर्देश पर संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी राहुल आनंद को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मामले में आरोप है कि योजना के तहत पात्र किसानों का सही तरीके से सत्यापन नहीं किया गया। साथ ही लाभार्थियों को किए गए भुगतान और योजना के क्रियान्वयन में भी कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं। थर्ड पार्टी सत्यापन के दौरान भी कई अनियमितताएं मिलने का दावा किया गया है।
11 सितंबर को अधिकारियों को किया गया तलब
संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद ने मामले की जांच शुरू करते हुए कृषि विभाग और उद्यान विभाग के अधिकारियों को 11 सितंबर को आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपने कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में अधिवक्ता विकेश नेगी ने 27 जुलाई को जिलाधिकारी से शिकायत की थी।
दस्तावेजों और भौतिक सत्यापन में मिली विसंगतियां
शिकायत के अनुसार, कई लाभार्थियों के आवेदन पत्र, भूमि संबंधी अभिलेख, पहचान पत्र, फोटो और अन्य जरूरी दस्तावेजों में कमी या असंगतियां पाई गईं। कुछ लाभार्थियों का सत्यापन गलत तरीके से किए जाने, जबकि कुछ का सत्यापन अधूरा रहने का भी आरोप है।
कुछ मामलों में आवेदन के साथ लगाए गए फोटो और अधिकारियों की ओर से मौके पर लिए गए फोटो में समानता नहीं मिली। इसके अलावा किसानों के खेतों में लगाए गए सिंचाई उपकरणों की जियो-टैगिंग नहीं होने और उपकरणों के मेक, मॉडल व ब्रांड से संबंधित पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आई है।
ई-वे बिल और वजन रसीदों पर भी उठे सवाल
जांच से जुड़े आरोपों में सामग्री के परिवहन के ई-वे बिल और अन्य दस्तावेज पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है। सामग्री की ढुलाई के दौरान किए गए वजन की रसीदें भी रिकॉर्ड में संलग्न नहीं मिलने से वास्तविक सामग्री की मात्रा की पुष्टि पर सवाल उठे हैं।
शासनादेश की अनदेखी का आरोप
शिकायत में कुछ मामलों में सक्षम अधिकारियों की अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया के बिना कार्य व भुगतान किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। ऑडिट के दौरान निरीक्षण अधिकारियों के नाम, सत्यापन की तारीखों और रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलने की बात कही गई है। कुछ मामलों में उपकरण स्थापित होने से पहले की तारीख वाली तस्वीरें होने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
अब मजिस्ट्रीयल जांच में इन सभी आरोपों और दस्तावेजों की जांच की जाएगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।



