
उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता का मामला अभी भी लंबित है। मदरसा बोर्ड से पंजीकृत 452 मदरसों में से 419 को अब तक शिक्षा विभाग से मान्यता नहीं मिल सकी है।
शिक्षा विभाग ने मान्यता के लिए आवेदन की समयसीमा को लेकर मदरसों को कुछ राहत दी है। निजी स्कूलों के लिए 31 अगस्त के बाद ऑनलाइन मान्यता आवेदनों पर विचार नहीं करने का प्रावधान है, लेकिन अधिकारियों के अनुसार पहले से संचालित मदरसों पर यह व्यवस्था लागू नहीं की जा रही है। ऐसे मदरसों से मान्यता के लिए आवेदन लिया जा सकता है।
देहरादून के मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जयसवाल के अनुसार, जिले में निरीक्षण के बाद सात मदरसों को मान्यता दी जा चुकी है, जबकि कुछ अन्य के आवेदन अभी विचाराधीन हैं।
शिक्षक पात्रता बनी बड़ी चुनौती
मान्यता प्रक्रिया में शिक्षकों की योग्यता भी एक बड़ी बाधा बन रही है। शिक्षा विभाग के अनुसार शिक्षकों के लिए डीएलएड, टीईटी और स्नातक जैसी निर्धारित योग्यताएं जरूरी हैं। कक्षा पांच तक के लिए कम से कम पांच कक्षाओं के साथ एक अतिरिक्त कक्ष की व्यवस्था भी आवश्यक है। वहीं, कक्षा एक से पांच तक के लिए टीईटी प्रथम और कक्षा छह से आठ तक के लिए टीईटी द्वितीय अनिवार्य बताया गया है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला कोषाध्यक्ष अब्दुल सत्तार के मुताबिक, धार्मिक और विद्यालयी शिक्षा के लिए अलग-अलग शिक्षकों की व्यवस्था भी मान्यता प्रक्रिया में चुनौती बन रही है।



