विश्व पर्यावरण दिवस: सरोजिनी मैठाणी ने बंजर जमीन को बनाया हरियाली की मिसाल, वर्षों की मेहनत से बदली तस्वीर

देहरादून: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तराखंड की सरोजिनी मैठाणी की प्रेरणादायक कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने अपने ससुराल की बंजर और अनुपजाऊ भूमि को वर्षों की मेहनत, लगन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण से हरे-भरे क्षेत्र में बदल दिया।
सरोजिनी मैठाणी ने न केवल बड़ी संख्या में पौधरोपण किया, बल्कि उनकी नियमित देखभाल कर भूमि को हरियाली से आच्छादित कर दिया। आज यह क्षेत्र पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक जागरूकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस जमीन पर कभी हरियाली का नामोनिशान नहीं था, वहां अब विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे लहलहा रहे हैं। उनके प्रयासों से क्षेत्र में जैव विविधता बढ़ी है और पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती मिली है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर सरोजिनी मैठाणी की यह पहल लोगों को प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रही है। उनका मानना है कि यदि हर व्यक्ति अपने आसपास कुछ पौधे लगाकर उनकी देखभाल करे तो पर्यावरण संबंधी कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।



