कांवड़ यात्रा का बदला स्वरूप: पिछले 8–10 वर्षों में कई गुना बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या, डाक कांवड़ का बढ़ा चलन

देहरादून: उत्तराखंड की प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा का स्वरूप पिछले आठ से दस वर्षों में तेजी से बदल गया है। पहले जहां अधिकांश श्रद्धालु पैदल चलकर हरिद्वार और अन्य गंगाघाटों से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचते थे, वहीं अब यात्रा में डाक कांवड़, बाइक कांवड़ और संगठित समूहों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। इसके साथ ही कांवड़ यात्रियों की संख्या में भी कई गुना इजाफा हुआ है।
विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, पहले कांवड़ यात्रा मुख्य रूप से सीमित संख्या में श्रद्धालुओं तक ही सीमित थी, लेकिन बेहतर सड़क संपर्क, सोशल मीडिया, धार्मिक आयोजनों और सुविधाओं के विस्तार के कारण अब हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में सेवा शिविर, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षा इंतजाम भी किए जाते हैं।
वर्तमान समय में डाक कांवड़ का चलन तेजी से बढ़ा है। इस परंपरा में श्रद्धालु कम समय में गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वाहन और विशेष व्यवस्थाओं का सहारा लेते हैं। इसके कारण यात्रा का स्वरूप पहले की तुलना में अधिक आधुनिक और व्यापक हो गया है।
कांवड़ यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश प्रशासन हर वर्ष सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक इंतजाम करता है। इस वर्ष भी यात्रा मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल, सीसीटीवी निगरानी, मेडिकल कैंप और ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था की गई है, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न हो सके।



