श्रीनगर: छह महीने में जन्मा बच्चा, वजन था सिर्फ 700 ग्राम; डॉक्टरों ने दो महीने में दिया नया जीवन

श्रीनगर गढ़वाल के बेस चिकित्सालय स्थित निक्कू वार्ड में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने बेहद कम वजन के एक प्री-मैच्योर नवजात को नया जीवन दिया है। रुद्रप्रयाग के पुनाड़ क्षेत्र निवासी अल्पना नौटियाल के बच्चे का जन्म महज 25 सप्ताह में हुआ था। जन्म के समय उसका वजन सिर्फ 700 ग्राम था और उसकी हालत गंभीर थी।
बच्चे को उपचार के लिए श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के बेस अस्पताल के निक्कू वार्ड में भर्ती कराया गया। करीब दो महीने तक डॉक्टरों की निगरानी और उपचार के बाद बच्चे की हालत में लगातार सुधार हुआ। उसका वजन बढ़कर 1300 ग्राम हो गया और उसने मां का दूध पीना भी शुरू कर दिया। स्वस्थ होने के बाद बच्चे को अस्पताल से घर भेज दिया गया। अस्पताल के चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने उसे प्यार से ‘निक्कू ग्रेजुएट’ का खिताब देकर विदाई दी।
बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. सीएम शर्मा ने बताया कि 25 से 30 सप्ताह में जन्म लेने वाले नवजातों के फेफड़े और शरीर के अन्य अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं। ऐसे बच्चों को वेंटिलेटर सपोर्ट, विशेष दवाओं, उचित पोषण और लगातार निगरानी की जरूरत होती है।
निक्कू वार्ड में पिछले एक साल के दौरान 25 से 30 सप्ताह के बीच जन्मे कई कम वजन वाले नवजातों का सफल उपचार किया गया है। यहां 27 सप्ताह में जन्मे नवजात समेत रुद्रप्रयाग से रेफर किए गए कई प्री-मैच्योर बच्चों का भी उपचार किया गया।
चिकित्सकों के अनुसार, निजी अस्पतालों में इस तरह के नवजातों के उपचार पर करीब 15 से 20 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है, जबकि बेस अस्पताल में पात्र मरीजों को सरकारी व्यवस्था के तहत उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत ने निक्कू वार्ड की पूरी टीम को इस सफलता के लिए बधाई दी।



