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मिडिल ईस्ट तनाव से भारतीय बासमती कारोबार प्रभावित, निर्यात घटने से किसानों पर बढ़ा दबाव

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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर भारत के बासमती चावल कारोबार पर पड़ने लगा है। शिपिंग रूट प्रभावित होने, माल ढुलाई की लागत बढ़ने और विदेशी बाजारों में अनिश्चितता के कारण निर्यातकों और मिलर्स ने मंडियों से बासमती की खरीद कम कर दी है।

बासमती एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन पंजाब के अध्यक्ष बल कृष्ण गर्ग के अनुसार, भारत हर महीने करीब 5 लाख टन बासमती चावल का निर्यात करता है, जिसमें पंजाब की हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई है। मिडिल ईस्ट में तनाव से पहले पंजाब से करीब 1.6 लाख टन बासमती का मासिक निर्यात होता था, लेकिन अब इसमें काफी गिरावट आई है।

माल ढुलाई की लागत में भारी बढ़ोतरी

तनाव के चलते कई शिपिंग कंपनियों ने अपनी सेवाएं सीमित कर दी हैं। इससे फ्रेट लागत में करीब 10 गुना तक बढ़ोतरी बताई जा रही है। पहले दुबई तक एक कंटेनर भेजने में करीब 500 डॉलर खर्च होते थे, जो अब 5,000 डॉलर से अधिक हो गया है।

सऊदी अरब भारतीय बासमती के प्रमुख खरीदारों में शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, दम्माम पोर्ट तक शिपमेंट में दिक्कतों के कारण कुछ निर्यातकों ने जेद्दा पोर्ट का रूट अपनाया है, जिससे परिवहन लागत और डिलीवरी का समय बढ़ रहा है।

नई फसल की आवक से किसानों की चिंता बढ़ी

पंजाब की मंडियों में बासमती की नई फसल की आवक शुरू हो चुकी है। ऐसे में निर्यात में कमी के साथ भंडारण की समस्या भी सामने आ रही है। मिलर्स के पास सीमित स्टोरेज क्षमता होने के कारण लंबे समय तक निर्यात कमजोर रहने पर मंडियों से खरीद और घट सकती है, जिसका असर किसानों पर पड़ने की आशंका है।

मोगा स्थित GG Agrotech के रॉबिन गोयल के मुताबिक, उनकी कंपनी का बासमती निर्यात फरवरी से पहले के मुकाबले करीब आधा रह गया है। कंपनी ने पिछले साल करीब 80,000 मीट्रिक टन बासमती खरीदा था, जबकि इस साल अधिकतम 50,000 मीट्रिक टन खरीद की योजना है।

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