
हजारीबाग के चौपारण क्षेत्र के जंगलों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने कई प्राचीन पुरातात्विक अवशेषों का निरीक्षण किया है। चोरदाहा पंचायत के सिलोदर, छोटकी मुर्तिया और बड़की मुर्तिया समेत आसपास के क्षेत्रों में प्राचीन मूर्तियां, स्तूप, शिवलिंग और मंदिर संरचनाओं के अवशेष मिले हैं।
एएसआई के सहायक पुरातत्वविद डॉ. नीरज मिश्रा के अनुसार, चौपारण प्राचीन उत्तरापथ का महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। यहां बौद्ध, जैन और सनातन परंपराओं से जुड़े पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं। टीम इन स्थलों का दस्तावेजीकरण कर रिपोर्ट तैयार कर रही है।
सिलोदर में करीब ढाई से तीन फुट ऊंची एक प्राचीन प्रतिमा की पहचान बौद्ध धर्म की देवी तारा के रूप में की गई है। प्रारंभिक आकलन में इसे 7वीं-8वीं शताब्दी से संबंधित माना गया है, हालांकि इसके काल और स्वरूप की पुष्टि के लिए विस्तृत अध्ययन जरूरी बताया गया है। बड़की मुर्तिया में मनौती स्तूप समेत कई अन्य अवशेष भी मौजूद हैं।
एएसआई के अनुसार, चौपारण के अन्य क्षेत्रों में भी प्राचीन मूर्तियां, स्थापत्य अवशेष और मृदभांड मिले हैं। लगातार सामने आ रहे साक्ष्यों को देखते हुए क्षेत्र के व्यापक वैज्ञानिक सर्वेक्षण, संरक्षण और दस्तावेजीकरण की जरूरत बताई गई है।



