
उत्तराखंड के Haridwar में कुंभ मेले से जुड़ी भूमि को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। वर्षों पहले संतों और श्रद्धालुओं के लिए आवंटित की गई जमीनें अब कथित रूप से महलों और स्थायी निर्माणों में बदलती जा रही हैं, जिससे धर्मनगरी का मूल स्वरूप खतरे में पड़ता दिख रहा है।
स्थानीय संतों और आश्रम प्रबंधकों का कहना है कि पहले कुंभ के दौरान साधु-संत सीमित संसाधनों में साधना करते थे और अस्थायी ढांचे बनाए जाते थे। लेकिन अब हालात बदल गए हैं—जहां पहले खुले क्षेत्र और आध्यात्मिक वातावरण था, वहां अब स्थायी निर्माण और कब्जे देखने को मिल रहे हैं।
आरोप है कि आरक्षित भूमि पर धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ता गया और कई जगहों पर अवैध तरीके से निर्माण कर दिए गए। कुछ मामलों में राजनीतिक संरक्षण की भी बात कही जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर विकास के नाम पर इसी तरह निर्माण कार्य जारी रहा, तो आने वाले समय में कुंभ क्षेत्र में अव्यवस्था और बढ़ सकती है। वहीं, संत समाज ने प्रशासन और सरकार से अपील की है कि धर्मनगरी की मूल पहचान और आध्यात्मिक स्वरूप को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।



