बंजर खेतों में उगी चाय बनी महिलाओं की आय का सहारा, रुद्रप्रयाग में बढ़ रहा महिला सशक्तिकरण

रुद्रप्रयाग: कभी अनुपयोगी और बंजर माने जाने वाले खेत अब महिलाओं के लिए रोजगार और आय का नया स्रोत बन रहे हैं। रुद्रप्रयाग जिले में चाय की खेती ने न केवल इन जमीनों को नई पहचान दी है, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान किया है। चाय उत्पादन से जुड़े कार्यों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी उनके सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही है।
चाय की खेती के विस्तार से स्थानीय महिलाओं को अपने गांव में ही रोजगार मिल रहा है, जिससे पलायन की समस्या कम करने में भी मदद मिल रही है। महिलाएं पौधरोपण, पत्तियों की तुड़ाई, प्रसंस्करण और विपणन जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, चाय की खेती बंजर और कम उपजाऊ भूमि पर भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। यही कारण है कि यह खेती पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका बढ़ाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है।
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि चाय की खेती से उन्हें नियमित आय मिलने लगी है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और आत्मनिर्भरता की भावना भी मजबूत हुई है।



