देहरादून में डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर 13 लाख की ठगी, NIA-ATS अधिकारी बनकर बुजुर्ग को बनाया शिकार

देहरादून में साइबर ठगी का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पटेलनगर क्षेत्र के एक बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर साइबर ठगों ने 13 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को एनआईए (NIA) और एटीएस (ATS) का अधिकारी बताते हुए बुजुर्ग को लालकिला बम ब्लास्ट के आरोपी का मददगार होने का झूठा आरोप लगाया और गिरफ्तारी का भय दिखाकर उनसे बड़ी रकम अपने खाते में ट्रांसफर करा ली।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित को 30 जुलाई को एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को वरिष्ठ जांच अधिकारी बताते हुए कहा कि उनका नाम एक गंभीर आतंकी मामले में सामने आया है। इसके बाद वीडियो कॉल पर अन्य लोगों ने खुद को NIA और ATS अधिकारी बताकर फर्जी गिरफ्तारी वारंट और संपत्ति जब्ती के दस्तावेज दिखाए। ठगों ने जांच में सहयोग करने के नाम पर पीड़ित से बैंक खातों, एफडी और अन्य निवेश की राशि निकलवाकर करीब 13 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए एक बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिए।
बाद में जब पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने पटेलनगर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और लेनदेन के आधार पर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठगों के नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती और न ही जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहती है। ऐसे किसी भी कॉल पर घबराने के बजाय तुरंत कॉल काटें, संबंधित एजेंसी से सत्यापन करें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।



