उत्तराखंड: इंटर कॉलेज में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक की तैनाती, तबादलों की प्रक्रिया पर उठे सवाल

पिथौरागढ़। उत्तराखंड शिक्षा विभाग में हालिया तबादलों के बाद शिक्षकों की तैनाती को लेकर एक नया मामला सामने आया है। पिथौरागढ़ जिले के राजकीय इंटर कॉलेज बांसबगड़ में विषयवार शिक्षकों की कमी के बीच प्राथमिक विद्यालय के एक शिक्षक को शिक्षण कार्य के लिए तैनात किया गया है। इस व्यवस्था ने विभागीय तबादला प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चार शिक्षकों के तबादले से पैदा हुई कमी
शिक्षा विभाग के अनुसार जीआईसी बांसबगड़ से एक साथ चार शिक्षकों के तबादले किए गए हैं। इसके बाद विद्यालय में शिक्षकों की कमी हो गई। खासतौर पर गणित विषय में एलटी स्तर पर कोई शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी।
मुख्य शिक्षा अधिकारी तरुण पंत के मुताबिक, इसी कमी को देखते हुए राजकीय प्राथमिक विद्यालय रुमीडोला, मुनस्यारी के सहायक अध्यापक कमलेश जोशी को छात्रहित में जीआईसी बांसबगड़ में शिक्षण कार्य के लिए तैनात किया गया है।
जनप्रतिनिधियों और प्रबंधन समिति में नाराजगी
एक साथ चार शिक्षकों के तबादले से विद्यालय की व्यवस्था प्रभावित होने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विद्यालय प्रबंधन समिति में नाराजगी है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो इसके विरोध में जन आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
1500 से अधिक शिक्षकों के हुए तबादले
शिक्षा विभाग में हाल ही में 1500 से अधिक शिक्षकों के तबादले किए गए हैं। इनमें कुछ तबादलों को लेकर प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। बांसबगड़ का मामला भी इसी कड़ी में सामने आया है, जहां तबादलों के बाद विषयवार शिक्षकों की कमी की समस्या पैदा हो गई।
दो साल पूरे होने से पहले शिक्षिका का तबादला, आदेश रद्द
एक अन्य मामले में जीआईसी चहज, पिथौरागढ़ की सहायक अध्यापिका हेमलता खाती का तबादला राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गंगोलीहाट कर दिया गया था। अपर निदेशक कुमाऊं मंडल गजेंद्र सिंह सौन के आदेश के अनुसार शिक्षिका ने सहायक अध्यापक एलटी पद पर दो साल भी पूरे नहीं किए थे और उनका परिवीक्षाकाल भी पूरा नहीं हुआ था। इसके चलते उनका तबादला रद्द कर दिया गया।
20-25 साल से दुर्गम क्षेत्रों में तैनात शिक्षक भी परेशान
शिक्षा विभाग की तबादला प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा सवाल यह भी है कि कई शिक्षक दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों में 20 से 25 साल से तैनात हैं। लंबे समय से प्रयास के बावजूद उन्हें सुगम क्षेत्रों में तबादला नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में दो साल की अवधि पूरी होने से पहले किसी शिक्षक के अनुरोध पर तबादला किए जाने जैसे मामलों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।



