उत्तराखंड

उत्तराखंड के मंडुवा और झंगोरा से घट सकता है मोटापा, ICMR-NIN कर रहा मिलेट्स की पौष्टिकता पर शोध

Listen to this News

देहरादून/हैदराबाद। उत्तराखंड की पारंपरिक थाली में सदियों से शामिल मंडुवा और झंगोरा अब आधुनिक पोषण विज्ञान के अध्ययन का हिस्सा बन गए हैं। देश में बढ़ती मोटापे की समस्या के बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN) के वैज्ञानिक इन पारंपरिक मिलेट्स की पौष्टिकता और स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव का अध्ययन कर रहे हैं।

ICMR-NIN की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के निर्देश पर वैज्ञानिक उत्तराखंड के पारंपरिक मिलेट्स मंडुवा, झंगोरा और चौलाई की पोषण क्षमता का अध्ययन कर रहे हैं। इन अनाजों की न्यूट्रिएंट वैल्यू सामने आने से भविष्य में मोटापे जैसी बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती से निपटने में मदद मिल सकती है।

खानपान और जीवनशैली का भी हो रहा अध्ययन

राष्ट्रीय पोषण संस्थान ने हाल ही में एक व्यापक सर्वे किया है। इसके तहत वैज्ञानिकों की टीम दो लाख से अधिक स्थानों और करीब 81 हजार घरों तक पहुंची। लोगों के खानपान और जीवनशैली से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। इस अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर संस्थान केंद्र सरकार को पोषण संबंधी सुझाव देगा।

डॉ. कुलकर्णी ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए पोषण की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने छोटे बच्चों के खानपान पर भी जोर देते हुए कहा कि दो वर्ष तक के बच्चों को शुगर नहीं देना चाहिए। उनका कहना है कि देश में मोटापा तेजी से बड़ी चुनौती बन रहा है, ऐसे में संतुलित और पौष्टिक आहार पर ध्यान देना जरूरी है।

मंडुवा से एनीमिया पर भी अध्ययन

उत्तराखंड के मंडुवा यानी रागी (फिंगर मिलेट) को लेकर एनीमिया पर भी वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं। रागी के सेवन से खून की कमी पर पड़ने वाले संभावित सकारात्मक प्रभावों का आकलन करने के लिए क्लिनिकल और एनालिटिकल स्टडी की जा रही है।

नमक और चीनी की मात्रा पर भी दी जानकारी

तकनीकी सत्र के दौरान पोषण सूचना एवं स्वास्थ्य शिक्षा प्रभाग के प्रमुख डॉ. सुब्बाराव एम. गवरपुर ने नमक और चीनी के सेवन को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सेंधा नमक, पिंक सॉल्ट और रॉक सॉल्ट समेत सभी तरह के नमक में लगभग 95 प्रतिशत सोडियम होता है। आयोडीन युक्त नमक को सही विकल्प बताते हुए उन्होंने इसके सेवन को सीमित रखने की सलाह दी।

उन्होंने बताया कि शक्कर, गुड़ या चीनी के पोषण प्रभाव में बड़ा अंतर नहीं है, इसलिए इनका सेवन भी सीमित मात्रा में किया जाना चाहिए। संस्थान की ओर से रोजाना करीब 2000 कैलोरी की संतुलित थाली में सब्जी, फल, दाल और अनाज जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल करने की जानकारी दी गई।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button