ऑस्ट्रेलिया में छात्र वीजा नियमों पर सख्ती, परिवार साथ लाने पर रोक; योग शिक्षकों को लेकर भी विवाद

कैनबरा: ऑस्ट्रेलिया ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों और अस्थायी वीजा धारकों से जुड़े नियमों को सख्त करने की दिशा में कदम उठाए हैं। सरकार का फोकस वीजा सिस्टम के दुरुपयोग और ‘वीजा हॉपिंग’ पर रोक लगाने के साथ-साथ देश में प्रवासन को नियंत्रित करने पर है।
ऑस्ट्रेलिया के इमिग्रेशन और गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों को एक ही स्तर के अलग-अलग कोर्स में दाखिला लेकर बार-बार वीजा बदलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पढ़ाई पूरी करने के बाद अगले कोर्स के लिए उच्च शैक्षणिक स्तर पर जाना होगा, जैसे बैचलर के बाद मास्टर डिग्री।
परिवार को साथ लाने पर भी सख्ती
प्रस्तावित बदलावों के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों और कुछ ग्रेजुएट वीजा धारकों के लिए परिवार के सदस्यों को ऑस्ट्रेलिया लाना सामान्य तौर पर प्रतिबंधित किया जाएगा। हालांकि, जो परिवार पहले से ऑस्ट्रेलिया में हैं, उन्हें अलग नहीं किया जाएगा। पीएचडी छात्रों और कुछ देशों के नागरिकों के लिए अपवाद रखा गया है।
भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है असर
जागरण के अनुसार, 2026 के शुरुआती पांच महीनों में ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में भारतीय छात्रों की हिस्सेदारी करीब 16 प्रतिशत रही। चीन के बाद भारत ऑस्ट्रेलिया में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दूसरा बड़ा स्रोत है। ऐसे में नए नियमों का भारतीय छात्रों पर भी असर पड़ सकता है।
योग शिक्षकों को लेकर विपक्ष के दावे पर विवाद
ऑस्ट्रेलिया में प्रवासन को लेकर चल रही राजनीतिक बहस में भारतीय योग शिक्षकों का मुद्दा भी चर्चा में है। विपक्ष की ओर से दावा किया गया था कि सरकार निर्माण श्रमिकों की तुलना में अधिक योग शिक्षकों को ला रही है। मंत्री टोनी बर्क ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि पिछले वित्त वर्ष में करीब 15,000 निर्माण श्रमिक ऑस्ट्रेलिया आए, जबकि मौजूदा सरकार ने किसी योग शिक्षक को वीजा नहीं दिया।
योग शिक्षकों का व्यवसाय ऑस्ट्रेलिया की संबंधित सूची में शामिल है। सरकार के अनुसार, इसका आधार भारत के साथ पिछली सरकार द्वारा किया गया व्यापार समझौता है, जिसमें हर साल 1,800 योग शिक्षकों और शेफ के लिए अस्थायी वीजा का प्रावधान किया गया था।



