
देहरादून में रक्षा मंत्रालय की सैन्य इंजीनियरिंग सेवा (एमईएस) में आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने तीन अलग-अलग ठेकों में कर्मचारियों की निर्धारित तैनाती के बिना उपस्थिति दर्ज कराकर भुगतान लेने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। मामले में दो सरकारी अधिकारियों, तीन ठेकेदारों और एक अन्य व्यक्ति समेत छह लोगों को नामजद किया गया है।
सीबीआई की प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस मामले में सरकारी खजाने को 18,43,334 रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। मामला वर्ष 2025-26 के दौरान रायपुर रोड स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के इंस्ट्रूमेंट्स एंड रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (आईआरडीई) परिसर में कर्मचारियों की तैनाती से जुड़ा है।
जांच में सामने आया कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के तहत दिए गए तीन अनुबंधों में निर्धारित संख्या में कर्मचारियों की तैनाती नहीं हुई थी। इसके बावजूद उपस्थिति दर्ज कर बिलों का भुगतान कराया गया।
आरोप है कि एचआर एंटरप्राइजेज के अनुबंध में 12 कर्मचारियों की तैनाती होनी थी, लेकिन दो कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। कनिष्का ग्लोबल सर्विसेज के अनुबंध में 11 कर्मचारियों की तैनाती निर्धारित थी, जबकि संबंधित प्रतिबंधित क्षेत्र में उनके काम करने का रिकॉर्ड नहीं मिला। वहीं, एयरस्टेक इंडिया के अनुबंध में 10 कर्मचारियों में से दो के अनुपस्थित रहने की बात सामने आई।
प्राथमिकी में एमईएस के सहायक गैरीसन इंजीनियर साकेत कुमार और जूनियर इंजीनियर वीरेंद्र सिंह रावत पर अनुपस्थित कर्मचारियों को उपस्थिति रजिस्टर में मौजूद दिखाने का आरोप है। इसके आधार पर ठेकेदारों के बिल पास किए जाने की बात कही गई है। बालकृष्ण छेत्री पर भी भुगतान प्रक्रिया में मदद करने का आरोप है।
सीबीआई मामले की जांच कर रही है। प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।



