उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पत्नी का मासिक भरण-पोषण 9 हजार से बढ़ाकर 14 हजार रुपये किया

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पत्नी को दिए जाने वाले मासिक भरण-पोषण (मेंटेनेंस) की राशि 9,000 रुपये से बढ़ाकर 14,000 रुपये प्रतिमाह कर दी है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने कहा कि भरण-पोषण की राशि ऐसी होनी चाहिए जिससे पत्नी सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सके और उसकी वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।
मामले में हल्द्वानी निवासी महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उसके पति वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड हैं और उनका शुद्ध मासिक वेतन लगभग 48,615 रुपये है। याचिकाकर्ता ने कहा कि वह स्लिप डिस्क की बीमारी से पीड़ित हैं और हर महीने इलाज व फिजियोथेरेपी पर काफी खर्च होता है, जबकि वर्तमान में मिल रही 9,000 रुपये की राशि उनके खर्चों के लिए पर्याप्त नहीं है।
वहीं, पति की ओर से दलील दी गई कि वह बेटी की पढ़ाई, परिवहन, ट्यूशन, बीमा और ऋण की किस्तों सहित कई अन्य खर्च भी वहन कर रहे हैं, इसलिए भरण-पोषण की राशि बढ़ाने का कोई आधार नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पति की आय, पत्नी की चिकित्सा जरूरतों और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भरण-पोषण बढ़ाने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि बढ़ी हुई 14,000 रुपये की राशि अगस्त 2026 से प्रभावी होगी और प्रत्येक माह की 10 तारीख तक पत्नी को भुगतान करनी होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि लगातार दो महीने तक भुगतान नहीं किया जाता है तो पत्नी कानून के तहत वसूली की कार्रवाई शुरू कर सकती है। साथ ही वह संबंधित विभाग से पति के वेतन से सीधे राशि काटकर अपने खाते में जमा कराने का अनुरोध भी कर सकती है।



