उत्तराखंड के युवा रवि टम्टा के फ्लाइंग कार प्रोजेक्ट को सीएम धामी का समर्थन, हरसंभव मदद का भरोसा

देहरादून। उत्तराखंड के युवा नवप्रवर्तक रवि टम्टा के फ्लाइंग कार बनाने के सपने को अब सरकारी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रवि टम्टा से मुलाकात कर उनके फ्लाइंग कार प्रोजेक्ट की जानकारी ली और उनके नवाचार की सराहना करते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।
रवि टम्टा ने मुख्यमंत्री आवास में सीएम धामी के सामने अपने प्रोजेक्ट की प्रगति और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने अपने स्टार्टअप Hapida Sky के तहत विकसित किए जा रहे फ्लाइंग व्हीकल के बारे में बताया। इस प्रोजेक्ट का प्रोटोटाइप पहले ही प्रारंभिक परीक्षण उड़ान पूरी कर चुका है।
पहाड़ों की चुनौती से आया फ्लाइंग कार का विचार
अल्मोड़ा के कफलीखान गांव के रहने वाले रवि टम्टा ने पहाड़ी क्षेत्रों में आने-जाने की कठिनाइयों को देखते हुए पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल विकसित करने का विचार शुरू किया। उनका कहना है कि पहाड़ों में कई स्थानों तक सड़क मार्ग से पहुंचने में काफी समय लगता है। ऐसे में भविष्य में फ्लाइंग व्हीकल कम समय में दूरी तय करने का विकल्प बन सकता है।
सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक व्हीकल का प्रोटोटाइप
रवि टम्टा के स्टार्टअप ने HAPIDA SKYNeX नाम से सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप तैयार किया है। यह ड्रोन तकनीक से प्रेरित मल्टी-रोटर सिस्टम पर आधारित है। अगस्त 2026 में अल्मोड़ा के एक खुले मैदान में इसके प्रोटोटाइप की प्रारंभिक टेस्ट फ्लाइट सफलतापूर्वक की गई थी।
सीएम धामी ने की नवाचार की सराहना
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रवि टम्टा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड के युवाओं में प्रतिभा, तकनीकी क्षमता और नवाचार की अपार संभावनाएं हैं। सरकार का प्रयास है कि युवाओं को नए विचारों और तकनीकी प्रयोगों को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक सहयोग और अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं के सपनों को पंख देना सरकार की प्राथमिकता है। आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ रहे युवाओं के नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ उसे धरातल पर उतारने के लिए भी हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
व्यावसायिक इस्तेमाल से पहले कई चुनौतियां
फ्लाइंग कार के शुरुआती परीक्षण के बाद भी इसे आम परिवहन के लिए इस्तेमाल किए जाने से पहले कई तकनीकी और नियामकीय चरणों से गुजरना होगा। सुरक्षा परीक्षण, उड़ान की स्थिरता, विश्वसनीयता, पेलोड, बैटरी क्षमता और अन्य तकनीकी मानकों के साथ विमानन नियमों और आवश्यक अनुमतियों को पूरा करना महत्वपूर्ण होगा।
रवि टम्टा का यह प्रयास उत्तराखंड में स्थानीय स्तर पर तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक अनोखी पहल के तौर पर देखा जा रहा है।



