पश्चिम चंपारण के गांव हर मानसून में हो जाते हैं अलग-थलग: पुल की मांग तेज, नदी पार कर स्कूल और अस्पताल पहुंचने को मजबूर ग्रामीण

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के कई गांव हर साल मानसून के दौरान मुख्यधारा से कट जाते हैं। बारिश के कारण नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों का जिला मुख्यालय और आसपास के कस्बों से संपर्क टूट जाता है। ऐसे में स्थानीय लोग वर्षों से स्थायी पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल नहीं होने के कारण बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बरसात के मौसम में लोगों को जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करनी पड़ती है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समक्ष पुल निर्माण की मांग उठाई गई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक स्थायी पुल बनने से दर्जनों गांवों को सालभर सुरक्षित और सुगम संपर्क मिल सकेगा तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच आसान होगी।
ग्रामीणों ने सरकार से जल्द पुल निर्माण की स्वीकृति देने और मानसून के दौरान होने वाली परेशानी का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि हर वर्ष बाढ़ और बारिश के कारण गांवों का संपर्क टूटना अब एक गंभीर समस्या बन चुका है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना चाहिए।



