Badrinath Dham: बारिश के बावजूद सूखने के कगार पर पहुंची बदरीश झील, PMO ने लिया संज्ञान; सफाई का काम शुरू

चमोली। बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही बदरीश झील इन दिनों सूखने के कगार पर पहुंच गई है। हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र में लगातार बारिश होने के बावजूद झील का जलस्तर बढ़ नहीं रहा है। मामले का प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने संज्ञान लिया है।
PMO की ओर से झील की स्थिति को लेकर शासन से जानकारी मांगी गई है और इसकी सफाई के निर्देश दिए गए हैं। बताया गया कि झील की सेटेलाइट तस्वीरों के अवलोकन में पानी की मात्रा काफी कम और बड़ी मात्रा में गाद जमा होने की स्थिति सामने आई है। इसके बाद जिला प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।
विशेषज्ञ संस्था कर रही झील की सफाई
PMO के संज्ञान के बाद प्रशासन ने बनारस की एक विशेषज्ञ संस्था के माध्यम से बदरीश झील की सफाई का काम शुरू कराया है। इसके साथ ही झील में पानी कम होने के कारणों की भी जांच की जा रही है।
प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि बद्रीनाथ मास्टर प्लान के तहत चल रहे निर्माण कार्यों का झील के प्राकृतिक जलस्रोतों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि प्राकृतिक जलस्रोतों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही झील में पानी कम होने के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा।
अक्तूबर में PM मोदी के दौरे की चर्चा
इधर, अक्तूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बद्रीनाथ धाम आने की चर्चाओं के बीच प्रशासन ने धाम में तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि, जिला प्रशासन ने प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर अभी तक किसी आधिकारिक कार्यक्रम की पुष्टि नहीं की है।
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने भी स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। इसके बावजूद बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के कार्यों में तेजी लाई जा रही है।
बदरीश झील का लगातार कम होता जलस्तर पर्यावरण और धाम की प्राकृतिक जल व्यवस्था को लेकर भी चिंता का विषय बन गया है। अब प्रशासन की नजर इस बात पर है कि झील के प्राकृतिक स्रोतों की स्थिति क्या है और पानी की कमी के पीछे वास्तविक वजह क्या सामने आती है।



