मसूरी-कैंपटी में बढ़ा भू-कटाव का खतरा, कमजोर हो रही मिट्टी; जलस्रोतों पर भी मंडराया संकट

मसूरी और कैंपटी क्षेत्र के जलग्रहण क्षेत्रों में मिट्टी के कमजोर होने और भू-कटाव का खतरा बढ़ रहा है। वन अनुसंधान संस्थान (FRI) के अध्ययन में सामने आया है कि लगातार हो रहे मिट्टी के कटाव से आने वाले समय में बड़े भूस्खलन की स्थिति पैदा हो सकती है। इसका सीधा असर क्षेत्र के प्राकृतिक जलस्रोतों पर भी पड़ने की आशंका है।
अध्ययन के मुताबिक, कैंपटी क्षेत्र में जलग्रहण क्षेत्रों की मिट्टी लगातार कमजोर हो रही है। बारिश के दौरान पानी के तेज बहाव के कारण ऊपरी सतह की मिट्टी बह रही है। इससे ढलानों की स्थिरता प्रभावित हो रही है और कई स्थानों पर भू-कटाव की स्थिति गंभीर होती जा रही है।
बड़े भूस्खलन का बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़े भूस्खलन हो सकते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में ढलानों का कमजोर होना सड़क, भवनों और अन्य बुनियादी ढांचे के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।
जलस्रोतों पर भी असर की आशंका
कैंपटी और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में प्राकृतिक जलस्रोत मौजूद हैं। मिट्टी के लगातार कटाव और जलग्रहण क्षेत्रों में बदलाव से इन जलस्रोतों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। इससे स्थानीय स्तर पर पानी की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण, वर्षाजल के बहाव को नियंत्रित करने और संवेदनशील ढलानों पर मिट्टी के कटाव को रोकने के उपायों पर जोर दिया है। अध्ययन के निष्कर्ष मसूरी-कैंपटी क्षेत्र में बढ़ते पर्यावरणीय दबाव के बीच समय रहते संरक्षण कार्य शुरू करने की जरूरत को रेखांकित करते हैं।



