धराली त्रासदी के एक साल बाद बदली तस्वीर, नगदी फसलों और स्वरोजगार से फिर खड़ा हुआ गांव

उत्तरकाशी के धराली गांव में आई विनाशकारी आपदा को एक वर्ष पूरा हो गया है। पिछले साल आई भीषण त्रासदी ने गांव के घर, होटल, दुकानें और लोगों की आजीविका को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था। हालांकि, एक साल बाद अब धराली के लोग अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर नई शुरुआत कर रहे हैं।
आपदा के बाद गांव के लोगों ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ नगदी फसलों पर अधिक ध्यान देना शुरू किया है। सेब, राजमा और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती से किसानों की आय बढ़ रही है। इसके अलावा कई युवाओं ने स्वरोजगार का रास्ता अपनाते हुए होमस्टे, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं, जिससे गांव की आर्थिक गतिविधियां फिर से पटरी पर लौट रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आपदा ने उन्हें बड़ा नुकसान पहुंचाया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सरकारी सहायता और स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयासों के साथ लोगों ने अपने घरों और आजीविका को दोबारा खड़ा करने का काम शुरू किया। अब गांव में फिर से रौनक लौट रही है और पर्यटकों की आवाजाही भी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है।
धराली के लोगों का मानना है कि प्राकृतिक आपदाओं से मुकाबला करने के लिए केवल सरकारी मदद ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सहयोग भी बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ गांव के लोग भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।
एक साल पहले आई इस त्रासदी ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था, लेकिन आज धराली पुनर्निर्माण, आत्मनिर्भरता और संघर्ष की मिसाल बनकर उभर रहा है।



