उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले हो सकती है जनगणना, तैयारियां शुरू; 131 गांवों में सितंबर में होगी गणना

देहरादून: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले जनगणना कराने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से अधिकारियों को आंतरिक रूप से तैयार रहने के संकेत दिए गए हैं। हालांकि, जनगणना के नए कार्यक्रम को लेकर अभी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
दरअसल, देशभर में जनगणना का दूसरा चरण अगले साल 9 से 28 फरवरी के बीच प्रस्तावित है। इसी दौरान उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया और जनगणना के कार्यक्रम में टकराव से बचने के लिए प्रदेश में जनगणना नवंबर-दिसंबर 2026 में कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके लिए विभागीय स्तर पर तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।
सितंबर में हिमाच्छादित क्षेत्रों में होगी जनगणना
उत्तराखंड के चार जिलों के हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना का दूसरा चरण सितंबर में आयोजित किया जाएगा। रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी के 131 गांवों के साथ केदारनाथ, बदरीनाथ और गंगोत्री के तीन विशेष निकायों में यह प्रक्रिया चलेगी। इन क्षेत्रों की अनुमानित आबादी करीब 52 हजार है।
कार्यक्रम के अनुसार, 17 से 31 अगस्त 2026 तक स्व-गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन होगी। इसके बाद 1 से 30 सितंबर तक घर-घर जाकर वास्तविक जनसंख्या गणना की जाएगी। 1 से 5 अक्तूबर तक रिविजनल राउंड आयोजित होगा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 1 अक्तूबर को संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है।
हरिद्वार में पूरा हो चुका है ट्रायल
उत्तराखंड में जनगणना का ट्रायल हरिद्वार में पूरा हो चुका है। ट्रायल के दौरान करीब 40 सवाल पूछे गए थे। हालांकि, अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तविक जनगणना में कितने सवाल शामिल होंगे।
जनगणना निदेशालय के अनुसार, इस बार गणना का काम डिजिटल तरीके से किया जाएगा। अधिकारियों की ओर से घर-घर जाकर जानकारी जुटाने के लिए आधिकारिक सेंसस मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा।
यदि उत्तराखंड में नवंबर-दिसंबर 2026 में जनगणना कराने का कार्यक्रम तय होता है, तो प्रदेश में देश के अन्य राज्यों से पहले जनगणना पूरी हो सकती है। फिलहाल विभाग आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा का इंतजार कर रहा है।



