उत्तराखंड शिक्षा विभाग: शिक्षकों की पदोन्नति का पेच, टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक भी इंतजार में; वरिष्ठता बनी बड़ी बाधा

देहरादून: उत्तराखंड के सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की पदोन्नति का मामला एक बार फिर अटक गया है। टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक भी पदोन्नति का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या वरिष्ठता को लेकर है। टीईटी पास शिक्षकों की पदोन्नति करने पर बिना टीईटी वाले उनसे वरिष्ठ शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित होने की आशंका है।
शिक्षा विभाग में चार हजार से अधिक सहायक अध्यापकों (एलटी) की प्रवक्ता पद पर पदोन्नति लंबित है। विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए शिक्षकों के लिए टीईटी द्वितीय अनिवार्य किए जाने की बात कही गई है। पदोन्नति और सेवा में बने रहने के लिए एलटी शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने का समय दिया गया है।
टीईटी पास शिक्षकों की पदोन्नति भी रुकी
वर्तमान स्थिति यह है कि जिन शिक्षकों ने टीईटी उत्तीर्ण कर लिया है, उनकी पदोन्नति भी नहीं हो पा रही है। विभाग के अनुसार, यदि इन शिक्षकों को वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दी जाती है तो उन शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित होगी, जिन्होंने अभी टीईटी नहीं किया है लेकिन सेवा में उनसे वरिष्ठ हैं।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद सिमल्टी के अनुसार, टीईटी पास शिक्षकों की पदोन्नति करने पर बिना टीईटी वाले शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित होगी। इसलिए जब तक इस मामले का समाधान नहीं होता, तब तक पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाना मुश्किल है।
शिक्षकों ने सरकार से मांगा समाधान
राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व प्रांतीय महामंत्री रमेश पैन्यूली ने सहायक अध्यापक एलटी को उत्तर प्रदेश की तर्ज पर टीईटी से छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी शासनादेश को पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार से टीईटी के मामले में अध्यादेश लाने या जल्द कोई वैकल्पिक रास्ता निकालने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद टीईटी को पदोन्नति और सेवा में बने रहने के लिए जरूरी किया गया है। ऐसे में शिक्षा विभाग के सामने अब टीईटी की अनिवार्यता और शिक्षकों की मौजूदा वरिष्ठता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। हजारों शिक्षक पदोन्नति के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।



