पांच साल बाद भी नियमित नहीं हुई प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति, प्रमोशन पर लगा ब्रेक

देहरादून। उत्तराखंड के माध्यमिक शिक्षा विभाग में प्रधानाध्यापकों की नियुक्तियों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। विभाग में करीब पांच वर्ष पहले हुई प्रधानाध्यापक पद की नियुक्तियां अब तक नियमित नहीं हो सकी हैं। इसका सीधा असर पदोन्नति प्रक्रिया पर पड़ा है, जिससे बड़ी संख्या में पात्र शिक्षकों के प्रमोशन लंबे समय से अटके हुए हैं।
जानकारी के अनुसार, नियमितीकरण नहीं होने के कारण विभाग में वरिष्ठता सूची और पदोन्नति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसके चलते कई शिक्षक वर्षों से उच्च पद पर पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, अनेक सरकारी विद्यालयों में स्थायी प्रधानाध्यापकों की कमी के कारण कार्यवाहक व्यवस्था के सहारे प्रशासनिक कार्य संचालित किए जा रहे हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि प्रधानाध्यापकों की नियुक्तियों का नियमितीकरण जल्द नहीं किया गया तो पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया और अधिक प्रभावित होगी। इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल प्रभावित हो रहा है, बल्कि विद्यालयों के प्रशासनिक कार्यों पर भी असर पड़ रहा है।
शिक्षकों ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि लंबित नियमितीकरण की प्रक्रिया को जल्द पूरा कर वरिष्ठता सूची का निस्तारण किया जाए, ताकि वर्षों से रुकी पदोन्नतियों का रास्ता साफ हो सके। उनका कहना है कि समय पर निर्णय होने से शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और विद्यालयों में प्रशासनिक स्थिरता आएगी।



