सावन में ब्रह्म कमल से खिली केदारपुरी, बाबा केदार को पुष्प अर्पित करने नंगे पांव पहुंच रहे भक्त

रुद्रप्रयाग: सावन मास में केदारपुरी की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बन रही है। हिमालय के बुग्यालों में इन दिनों राज्य पुष्प ब्रह्म कमल खिलने लगे हैं। चोराबाड़ी ताल, बासुकीताल और ऊपरी बुग्यालों में खिले ब्रह्म कमल की सुगंध और खूबसूरती श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ब्रह्म कमल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पुष्प को बाबा केदार को अर्पित करने के लिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक पहुंचते हैं। कई भक्त नंगे पांव इन स्थानों पर जाते हैं और ब्रह्म कमल लाकर भगवान शिव की पूजा में अर्पित करते हैं।
शिव को ब्रह्म कमल अर्पित करने की विशेष मान्यता
केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों के अनुसार सावन में भगवान शिव को ब्रह्म कमल अर्पित कर पूजा-अर्चना करने की विशेष धार्मिक मान्यता है। माना जाता है कि भगवान शिव को अर्पित ब्रह्म कमल को प्रसाद के रूप में प्राप्त करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
तीर्थ पुरोहित उमेश पोस्ती के अनुसार सावन में ब्रह्म कमल अर्पित कर शिव आराधना करने से सुख और पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि इस परंपरा के तहत भगवान शिव को अर्पित पुष्प श्रद्धालुओं और यजमानों को भी भेजे जाते हैं।
औषधीय गुणों से भी भरपूर माना जाता है ब्रह्म कमल
ब्रह्म कमल उत्तराखंड का राज्य पुष्प है। धार्मिक महत्व के साथ इसे विभिन्न औषधीय गुणों वाला पुष्प भी माना जाता है। हिमालय के ऊंचाई वाले बुग्यालों में इसके खिलने से इन दिनों केदारपुरी और आसपास के क्षेत्रों की प्राकृतिक छटा और भी मनमोहक हो गई है।
14.41 लाख से अधिक श्रद्धालु कर चुके बाबा केदार के दर्शन
इस वर्ष केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को आम श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। रिपोर्ट के अनुसार अब तक 14 लाख 41 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। वहीं, द्वितीय केदार मद्महेश्वर में करीब 44 हजार और तृतीय केदार तुंगनाथ में करीब 1.28 लाख यात्री दर्शन कर चुके हैं।



